Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.137.7-8h: महापुरुषों ने कहा: कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की अश्लेषा नक्षत्र और शुभ अष्टमी तिथि के अवसर पर, जो मनुष्य संयमित आहार-विहार और क्रोधरहित होकर, निम्न मंत्र का पाठ करता है और श्राद्ध के अवसर पर हमें गुड़ मिले चावल देता है (उसे महान फल प्राप्त होता है)।   |   mahabharat अध्याय 13.137: दिग्गजोंका धर्मसम्बन्धी रहस्य एवं प्रभाव   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 137: दिग्गजोंका धर्मसम्बन्धी रहस्य एवं प्रभाव  »  श्लोक 7-8h
 
 
श्लोक  13.137.7-8h 
दिग्गजा ऊचु:
कार्तिके मासि चाश्लेषा बहुलस्याष्टमी शिवा।
तेन नक्षत्रयोगेन यो ददाति गुडौदनम्॥ ७॥
इमं मन्त्रं जपन् श्राद्धे यताहारो ह्यकोपन:।
 
 
अनुवाद
महापुरुषों ने कहा: कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की अश्लेषा नक्षत्र और शुभ अष्टमी तिथि के अवसर पर, जो मनुष्य संयमित आहार-विहार और क्रोधरहित होकर, निम्न मंत्र का पाठ करता है और श्राद्ध के अवसर पर हमें गुड़ मिले चावल देता है (उसे महान फल प्राप्त होता है)।
 
The great men said: On the occasion of the Aslesha nakshatra and the auspicious Ashtami tithi in the dark fortnight of the month of Kartika, who, being restrained in his food habits and being devoid of anger, recites the following mantra and gives us rice mixed with jaggery on the occasion of the Shraddha (receives great fruits).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)