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mahabharat 13.137.6: रेणुका बोलीं, "हे महाबली दैत्यों! देवताओं और पितरों की अनुमति से मैं यहाँ आई हूँ और मैं आपके धर्म विषयक गम्भीर विचारों को उनके यथार्थ रूप में सुनना चाहती हूँ। हे सौभाग्यशाली दैत्यों! आपकी बुद्धि में धर्म का जो भी सार है, उसे मुझे बताइए॥6॥   |   mahabharat अध्याय 13.137: दिग्गजोंका धर्मसम्बन्धी रहस्य एवं प्रभाव   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 137: दिग्गजोंका धर्मसम्बन्धी रहस्य एवं प्रभाव  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  13.137.6 
रेणुक उवाच
अनुज्ञातोऽस्मि देवैश्च पितृभिश्च महाबला:।
धर्मगुह्यानि युष्माकं श्रोतुमिच्छामि तत्त्वत:।
कथयध्वं महाभागा यद् वस्तत्त्वं मनीषितम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
रेणुका बोलीं, "हे महाबली दैत्यों! देवताओं और पितरों की अनुमति से मैं यहाँ आई हूँ और मैं आपके धर्म विषयक गम्भीर विचारों को उनके यथार्थ रूप में सुनना चाहती हूँ। हे सौभाग्यशाली दैत्यों! आपकी बुद्धि में धर्म का जो भी सार है, उसे मुझे बताइए॥6॥
 
Renuka said, "O mighty giants! I have come here because the gods and ancestors have given me the permission and I want to hear your deep thoughts on religion in their true form. O fortunate giants! Tell me whatever essence of religion is contained in your intellect. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)