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mahabharat 13.137.14-15: यदि कोई ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र इस प्रकार एक वर्ष तक हमारे लिए व्रत और यज्ञ करता है, तो उसका महान फल मिलता है। यदि चींटी के टीले के पास यज्ञ किया जाए, तो उसका फल और भी अधिक माना जाता है।   |   mahabharat अध्याय 13.137: दिग्गजोंका धर्मसम्बन्धी रहस्य एवं प्रभाव   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 137: दिग्गजोंका धर्मसम्बन्धी रहस्य एवं प्रभाव  »  श्लोक 14-15
 
 
श्लोक  13.137.14-15 
ब्राह्मण: क्षत्रियो वैश्य: शूद्रो वा यद्युपोषित:॥ १४॥
एवं संवत्सरं कृत्वा दानं बहुफलं लभेत् ।
वल्मीके बलिमादाय तन्नो बहुफलं मतम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
यदि कोई ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र इस प्रकार एक वर्ष तक हमारे लिए व्रत और यज्ञ करता है, तो उसका महान फल मिलता है। यदि चींटी के टीले के पास यज्ञ किया जाए, तो उसका फल और भी अधिक माना जाता है।
 
If a Brahmin, Kshatriya, Vaishya or Shudra fasts and makes sacrifices for us in this manner for a year, then it yields great results. If a sacrifice is offered near an anthill, then it is considered to yield greater results for us.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)