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mahabharat 13.137.13-14h: इस प्रकार संतुष्ट रहने से पृथ्वी के नीचे का बोझ हमारे ऊपर होने पर भी हमें वह कठिन काम नहीं लगता और हम पृथ्वी का बोझ प्रसन्नतापूर्वक उठाते हैं। हम सब ऐसा इसलिए मानते हैं, क्योंकि बोझ से दबे होने पर भी हमें किसी से कुछ नहीं चाहिए। ॥13 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.137: दिग्गजोंका धर्मसम्बन्धी रहस्य एवं प्रभाव   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 137: दिग्गजोंका धर्मसम्बन्धी रहस्य एवं प्रभाव  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  13.137.13-14h 
एवं तुष्टास्तत: सर्वे अधस्ताद्भारपीडिता:।
श्रमं तं नावबुध्यामो धारयन्तो वसुंधराम्॥ १३॥
एवं मन्यामहे सर्वे भारार्ता निरपेक्षिण:।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार संतुष्ट रहने से पृथ्वी के नीचे का बोझ हमारे ऊपर होने पर भी हमें वह कठिन काम नहीं लगता और हम पृथ्वी का बोझ प्रसन्नतापूर्वक उठाते हैं। हम सब ऐसा इसलिए मानते हैं, क्योंकि बोझ से दबे होने पर भी हमें किसी से कुछ नहीं चाहिए। ॥13 1/2॥
 
Being satisfied in this way, even though we are burdened with the burden under the earth, it does not seem like hard work to us and we happily bear the burden of the earth. We all believe this because we do not want anything from anyone even though we are burdened with the burden. ॥13 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)