Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.136.8-9h: जो व्यक्ति अपने शरीर पर गोबर का लेप करता है, हाथ में वचा नामक औषधि रखता है, माथे पर घी और साबुत चावल धारण करता है तथा मांस नहीं खाता, उसे हम हानि नहीं पहुंचा सकते। | mahabharat अध्याय 13.136: प्रमथगणोंके द्वारा धर्माधर्मसम्बन्धी रहस्यका कथन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गोरोचनासमालम्भो वचाहस्तश्च यो भवेत्।
घृताक्षतं च यो दद्यान्मस्तके तत्परायण:॥ ८॥
ये च मांसं न खादन्ति तान् न शक्नुम हिंसितुम्।
अनुवाद
जो व्यक्ति अपने शरीर पर गोबर का लेप करता है, हाथ में वचा नामक औषधि रखता है, माथे पर घी और साबुत चावल धारण करता है तथा मांस नहीं खाता, उसे हम हानि नहीं पहुंचा सकते।
We cannot harm a person who applies cow dung cake to his body, keeps a medicine called Vacha in his hand, wears ghee and whole rice on his forehead and does not eat meat. 8 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥