Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.135.5: श्रद्धाहीन, अभिमानी, ब्रह्महत्यारे और व्यभिचारी इन चार प्रकार के लोगों से बात भी नहीं करनी चाहिए। इनके सामने धर्म का रहस्य प्रकट नहीं करना चाहिए। 5॥ | mahabharat अध्याय 13.135: अरुन्धती, धर्मराज और चित्रगुप्तद्वारा धर्मसम्बन्धी रहस्यका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अश्रद्दधानो मानी च ब्रह्महा गुरुतल्पग:।
असम्भाष्या हि चत्वारो नैषां धर्म: प्रकाशयेत्॥ ५॥
अनुवाद
श्रद्धाहीन, अभिमानी, ब्रह्महत्यारे और व्यभिचारी इन चार प्रकार के लोगों से बात भी नहीं करनी चाहिए। इनके सामने धर्म का रहस्य प्रकट नहीं करना चाहिए। 5॥
One should not even talk to these four types of people who are devoid of faith, arrogant, murderers of Brahma and adulterers. Do not reveal the secrets of religion in front of them. 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥