Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.135.40: देवता, पितर, स्नातक ब्राह्मण तथा अन्य तपस्वियों को इन पाँच पापियों से बात भी नहीं करनी चाहिए ॥40॥ | mahabharat अध्याय 13.135: अरुन्धती, धर्मराज और चित्रगुप्तद्वारा धर्मसम्बन्धी रहस्यका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
असम्भाष्या: पितॄणां च देवानां चैव पञ्च ते।
स्नातकानां च विप्राणां ये चान्ये च तपोधना:॥ ४०॥
अनुवाद
देवता, पितर, स्नातक ब्राह्मण तथा अन्य तपस्वियों को इन पाँच पापियों से बात भी नहीं करनी चाहिए ॥40॥
The gods, ancestors, graduate brahmins and other ascetics should not even talk to these five sinners. ॥ 40॥
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि अरुन्धतीचित्रगुप्तरहस्ये त्रिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १३०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें अरुन्धती और चित्रगुप्तका धर्मसम्बन्धी रहस्यविषयक एक सौ तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १३०॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥