Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.135.20-21: इसके अलावा चित्रगुप्त ने एक और धर्म के बारे में भी बताया है। उसके विभिन्न लाभों का वर्णन सभी संतों को सुनना चाहिए। सभी प्राणियों का समय आने पर विनाश होता है।   |   mahabharat अध्याय 13.135: अरुन्धती, धर्मराज और चित्रगुप्तद्वारा धर्मसम्बन्धी रहस्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 135: अरुन्धती, धर्मराज और चित्रगुप्तद्वारा धर्मसम्बन्धी रहस्यका वर्णन  »  श्लोक 20-21
 
 
श्लोक  13.135.20-21 
अयं चैवापरो धर्मश्चित्रगुप्तेन भाषित:॥ २०॥
फलमस्य पृथक्त्वेन श्रोतुमर्हन्ति सत्तमा:।
प्रलयं सर्वभूतैस्तु गन्तव्यं कालपर्ययात्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
इसके अलावा चित्रगुप्त ने एक और धर्म के बारे में भी बताया है। उसके विभिन्न लाभों का वर्णन सभी संतों को सुनना चाहिए। सभी प्राणियों का समय आने पर विनाश होता है।
 
Apart from this, Chitragupt has also told about another religion. All the saints should listen to the description of its different benefits. All creatures meet destruction in due course of time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)