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mahabharat 13.135.18: अब मैं चित्रगुप्त के मतानुसार कुछ लाभदायक धार्मिक आचरणों का वर्णन करूँगा। मनुष्य को सदैव जल और दीपदान करना चाहिए॥18॥   |   mahabharat अध्याय 13.135: अरुन्धती, धर्मराज और चित्रगुप्तद्वारा धर्मसम्बन्धी रहस्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.135.18 
किंचिद् धर्मं प्रवक्ष्यामि चित्रगुप्तमतं शुभम्।
पानीयं चैव दीपं च दातव्यं सततं तथा॥ १८॥
 
 
अनुवाद
अब मैं चित्रगुप्त के मतानुसार कुछ लाभदायक धार्मिक आचरणों का वर्णन करूँगा। मनुष्य को सदैव जल और दीपदान करना चाहिए॥18॥
 
Now I will describe some beneficial religious practices as per the views of Chitragupt. A person should always donate water and lamps.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)