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mahabharat 13.135.1-2: भीष्मजी कहते हैं - राजन ! तत्पश्चात् समस्त ऋषियों, पितरगणों और देवताओं ने एकाग्र होकर तप में प्रगाढ़ तथा शील एवं बल में महात्मा वशिष्ठजी के समान अरुन्धती देवी से पूछा - 'भद्रे ! हम आपसे धर्म का रहस्य सुनना चाहते हैं। आप कृपा करके मुझे अपने मतानुसार परम गोपनीय धर्म बताइये।' 1-2॥   |   mahabharat अध्याय 13.135: अरुन्धती, धर्मराज और चित्रगुप्तद्वारा धर्मसम्बन्धी रहस्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 135: अरुन्धती, धर्मराज और चित्रगुप्तद्वारा धर्मसम्बन्धी रहस्यका वर्णन  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  13.135.1-2 
भीष्म उवाच
ततस्त्वृषिगणा: सर्वे पितरश्च सदेवता:।
अरुन्धतीं तपोवृद्धामपृच्छन्त समाहिता:॥ १॥
समानशीलां वीर्येण वसिष्ठस्य महात्मन:।
त्वत्तो धर्मरहस्यानि श्रोतुमिच्छामहे वयम्।
यत्ते गुह्यतमं भद्रे तत् प्रभाषितुमर्हसि॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - राजन ! तत्पश्चात् समस्त ऋषियों, पितरगणों और देवताओं ने एकाग्र होकर तप में प्रगाढ़ तथा शील एवं बल में महात्मा वशिष्ठजी के समान अरुन्धती देवी से पूछा - 'भद्रे ! हम आपसे धर्म का रहस्य सुनना चाहते हैं। आप कृपा करके मुझे अपने मतानुसार परम गोपनीय धर्म बताइये।' 1-2॥
 
Bhishmaji says – King! Thereafter, all the sages, ancestors and gods concentrated and asked Arundhati Devi, who had grown in penance and was equal to Mahatma Vashishthaji in modesty and power – 'Bhadre! We want to hear the secret of religion from you. Please tell me the most secret religion in your opinion. 1-2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)