Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.134.4: इसलिए जो पुरुष अपना कल्याण चाहता है, उसे चाहिए कि वह पराई स्त्री और बांझ स्त्री का त्याग कर दे तथा ब्राह्मण का धन कभी न चुराए ॥4॥   |   mahabharat अध्याय 13.134: लोमशद्वारा धर्मके रहस्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 134: लोमशद्वारा धर्मके रहस्यका वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  13.134.4 
तस्मात् परस्य वै दारांस्त्यजेद् वन्ध्यां च योषितम्।
ब्रह्मस्वं हि न हर्तव्यमात्मनो हितमिच्छता॥ ४॥
 
 
अनुवाद
इसलिए जो पुरुष अपना कल्याण चाहता है, उसे चाहिए कि वह पराई स्त्री और बांझ स्त्री का त्याग कर दे तथा ब्राह्मण का धन कभी न चुराए ॥4॥
 
Therefore a man who seeks his own welfare should abandon another's wife and a barren woman and should never steal the wealth of a Brahmin. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)