Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.134.15: इस प्राचीन धार्मिक रहस्य को ऋषियों ने देखा है। स्वर्ग और पितृलोक में भी देवताओं और पितरों ने इसका सम्मान किया है। इस प्रकार मैंने इस धर्म का वर्णन किया है ॥15॥ | mahabharat अध्याय 13.134: लोमशद्वारा धर्मके रहस्यका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स्वर्गे च पितृलोके च पितृदेवाभिपूजितम्।
एवमेतन्मयोद्दिष्टमृषिदृष्टं पुरातनम्॥ १५॥
अनुवाद
इस प्राचीन धार्मिक रहस्य को ऋषियों ने देखा है। स्वर्ग और पितृलोक में भी देवताओं और पितरों ने इसका सम्मान किया है। इस प्रकार मैंने इस धर्म का वर्णन किया है ॥15॥
This ancient religious secret has been observed by sages. The gods and ancestors have respected it even in heaven and the world of ancestors. This is how I have described this religion. ॥15॥
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि लोमशरहस्ये एकोनत्रिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १२९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें लोमशवर्णित धर्मका रहस्यविषयक एक सौ उन्तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२९॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥