श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 134: लोमशद्वारा धर्मके रहस्यका वर्णन  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  13.134.12-13 
तिलपात्रे फलं प्राह भगवान‍् पाकशासन:।
गोप्रदानं च य: कुर्याद् भूमिदानं च शाश्वतम्॥ १२॥
अग्निष्टोमं च यो यज्ञं यजेत बहुदक्षिणम्।
तिलपात्रं सहैतेन समं मन्यन्ति देवता:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
भगवान् इन्द्र ने तिलदान का फल इस प्रकार बताया है- जो सदा गौ और भूमि का दान करता है तथा जो अनेक दक्षिणावाले अग्निष्टोम यज्ञों का अनुष्ठान करता है, देवता भी तिलदान को उसी का पुण्य मानते हैं ॥12-13॥
 
Lord Indra has explained the result of donating sesame seeds in this way – the one who always donates cows and land and who performs the rituals of many Dakshinavale Agnishtom Yagya, the gods also consider the donation of sesame seeds as the good deeds of him. 12-13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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