Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.134.10-11: जो मनुष्य प्रातःकाल उठकर स्नान करता है, शुद्ध श्वेत वस्त्र धारण करता है, मन को एकाग्र करके ब्राह्मणों को तिल का तर्पण करता है, तथा अपने पितरों को शहद मिले तिल, दीप और खिचड़ी देता है, उसे जो फल मिलता है, उसका वर्णन सुनो॥10-11॥ | mahabharat अध्याय 13.134: लोमशद्वारा धर्मके रहस्यका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कल्यमुत्थाय यो मर्त्य: स्नात: शुक्लेन वाससा।
तिलपात्रं प्रयच्छेत ब्राह्मणेभ्य: समाहित:॥ १०॥
तिलोदकं च यो दद्यात् पितॄणां मधुना सह।
दीपकं कृसरं चैव श्रूयतां तस्य यत् फलम्॥ ११॥
अनुवाद
जो मनुष्य प्रातःकाल उठकर स्नान करता है, शुद्ध श्वेत वस्त्र धारण करता है, मन को एकाग्र करके ब्राह्मणों को तिल का तर्पण करता है, तथा अपने पितरों को शहद मिले तिल, दीप और खिचड़ी देता है, उसे जो फल मिलता है, उसका वर्णन सुनो॥10-11॥
Listen to the description of the reward that a person gets who wakes up early in the morning, takes a bath, wears pure white clothes, and after concentrating his mind, makes offerings of sesame seeds to the Brahmins, and gives sesame seeds mixed with honey, a lamp and Khichdi to his ancestors.॥ 10-11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥