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mahabharat 13.132.5: त्यौहार के दिनों में देवता उसके द्वारा दी गई भेंट स्वीकार नहीं करते, उसके पितर भी रुष्ट हो जाते हैं और उसके कुल का नाश हो जाता है ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 13.132: अग्नि, लक्ष्मी, अंगिरा, गार्ग्य, धौम्य तथा जमदग्निके द्वारा धर्मके रहस्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 132: अग्नि, लक्ष्मी, अंगिरा, गार्ग्य, धौम्य तथा जमदग्निके द्वारा धर्मके रहस्यका वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  13.132.5 
हव्यं न तस्य देवाश्च प्रतिगृह्णन्ति पर्वसु।
कुप्यन्ते पितरश्चास्य कुले वंशोऽस्य हीयते॥ ५॥
 
 
अनुवाद
त्यौहार के दिनों में देवता उसके द्वारा दी गई भेंट स्वीकार नहीं करते, उसके पितर भी रुष्ट हो जाते हैं और उसके कुल का नाश हो जाता है ॥5॥
 
On festival days the gods do not accept the offerings made by him. His forefathers also become angry and his family's lineage is destroyed. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)