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mahabharat 13.132.4: जो मूर्ख मनुष्य अमावस्या के दिन दांत साफ करने के लिए लकड़ी चबाता है, उससे चन्द्रमा को हानि होती है और पितरों को भी कष्ट होता है ॥4॥   |   mahabharat अध्याय 13.132: अग्नि, लक्ष्मी, अंगिरा, गार्ग्य, धौम्य तथा जमदग्निके द्वारा धर्मके रहस्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 132: अग्नि, लक्ष्मी, अंगिरा, गार्ग्य, धौम्य तथा जमदग्निके द्वारा धर्मके रहस्यका वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  13.132.4 
दन्तकाष्ठं तु य: खादेदमावास्यामबुद्धिमान्।
हिंसितश्चन्द्रमास्तेन पितरश्चोद्विजन्ति च॥ ४॥
 
 
अनुवाद
जो मूर्ख मनुष्य अमावस्या के दिन दांत साफ करने के लिए लकड़ी चबाता है, उससे चन्द्रमा को हानि होती है और पितरों को भी कष्ट होता है ॥4॥
 
A foolish person who chews wood for cleaning teeth on the new moon day causes harm to the moon and also distresses the ancestors. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)