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mahabharat 13.132.3: जो मूर्ख अमावस्या के दिन किसी भी पौधे का एक पत्ता भी तोड़ता है, उसे ब्रह्महत्या का पाप लगता है ॥3॥   |   mahabharat अध्याय 13.132: अग्नि, लक्ष्मी, अंगिरा, गार्ग्य, धौम्य तथा जमदग्निके द्वारा धर्मके रहस्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 132: अग्नि, लक्ष्मी, अंगिरा, गार्ग्य, धौम्य तथा जमदग्निके द्वारा धर्मके रहस्यका वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  13.132.3 
वनस्पतिं च यो हन्यादमावास्यामबुद्धिमान्।
अपि ह्येकेन पत्रेण लिप्यते ब्रह्महत्यया॥ ३॥
 
 
अनुवाद
जो मूर्ख अमावस्या के दिन किसी भी पौधे का एक पत्ता भी तोड़ता है, उसे ब्रह्महत्या का पाप लगता है ॥3॥
 
A fool who plucks even a single leaf of any plant on the new moon day commits the sin of killing a brahmin. ॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)