Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.132.19: (प्राचीन काल में एक ब्राह्मण ने) शुद्ध हृदय से एक ब्राह्मण को एक किलो सत्तू दान करके ब्रह्मलोक प्राप्त किया था। हृदय की पवित्रता का महत्व समझाने के लिए यह एक ही उदाहरण पर्याप्त है॥19॥ | mahabharat अध्याय 13.132: अग्नि, लक्ष्मी, अंगिरा, गार्ग्य, धौम्य तथा जमदग्निके द्वारा धर्मके रहस्यका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
(प्राचीन काल में एक ब्राह्मण ने) शुद्ध हृदय से एक ब्राह्मण को एक किलो सत्तू दान करके ब्रह्मलोक प्राप्त किया था। हृदय की पवित्रता का महत्व समझाने के लिए यह एक ही उदाहरण पर्याप्त है॥19॥
(In ancient times a Brahmin) had attained Brahmaloka by donating a kilo of Sattu to a Brahmin with a pure heart. This one example alone will be enough to explain the importance of purity of heart.॥ 19॥
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि देवरहस्ये सप्तविंशत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १२७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें देवताओंका रहस्यविषयक एक सौ सत्ताईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥