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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 132: अग्नि, लक्ष्मी, अंगिरा, गार्ग्य, धौम्य तथा जमदग्निके द्वारा धर्मके रहस्यका वर्णन
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श्लोक 15
श्लोक
13.132.15
धौम्य उवाच
भिन्नभाण्डं च खट्वां च कुक्कुटं शुनकं तथा।
अप्रशस्तानि सर्वाणि यश्च वृक्षो गृहेरुह:॥ १५॥
अनुवाद
धौम्य बोले - घर में टूटे बर्तन, टूटी खाट, मुर्गी, कुत्ता और अश्वत्थ वृक्ष का होना अच्छा नहीं माना जाता।
Dhoumya said - It is not considered good to have broken utensils, a broken cot, a chicken, a dog and the Ashwattha tree in the house. 15.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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