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mahabharat 13.132.14: श्राद्ध और यज्ञ के दिन मनुष्य को स्नान आदि से शुद्ध होकर श्वेत वस्त्र धारण करने चाहिए। ब्राह्मणों से स्वस्तिवाचन करवाना चाहिए और महाभारत (गीता आदि) का पाठ करवाना चाहिए। ऐसा करने से उसका हव्य और काव्य अक्षय हो जाता है। 14॥   |   mahabharat अध्याय 13.132: अग्नि, लक्ष्मी, अंगिरा, गार्ग्य, धौम्य तथा जमदग्निके द्वारा धर्मके रहस्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 132: अग्नि, लक्ष्मी, अंगिरा, गार्ग्य, धौम्य तथा जमदग्निके द्वारा धर्मके रहस्यका वर्णन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  13.132.14 
शुक्लवासा: शुचिर्भूत्वा ब्राह्मणान् स्वस्ति वाचयेत्।
कीर्तयेद् भारतं चैव तथा स्यादक्षयं हवि:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
श्राद्ध और यज्ञ के दिन मनुष्य को स्नान आदि से शुद्ध होकर श्वेत वस्त्र धारण करने चाहिए। ब्राह्मणों से स्वस्तिवाचन करवाना चाहिए और महाभारत (गीता आदि) का पाठ करवाना चाहिए। ऐसा करने से उसका हव्य और काव्य अक्षय हो जाता है। 14॥
 
On the day of Shraddha and Yagya, a person should get purified by bathing etc. and wear white clothes. Make Brahmins recite Swastiva and recite Mahabharata (Geeta etc.). By doing this his havya and poetry become inexhaustible. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)