vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 131: विष्णु, बलदेव, देवगण, धर्म, अग्नि, विश्वामित्र, गोसमुदाय और ब्रह्माजीके द्वारा धर्मके गूढ़ रहस्यका वर्णन
»
श्लोक 7-8
श्लोक
13.131.7-8
अन्यथा हि वृथा मर्त्या: पूजयन्त्यल्पबुद्धय:॥ ७॥
नाहं तत् प्रतिगृह्णामि न सा तुष्टिकरी मम॥ ८॥
अनुवाद
अल्पबुद्धि वाले लोग व्यर्थ ही अन्य प्रकार से मेरी पूजा करते हैं। मैं उसे स्वीकार नहीं करता। वह पूजा मुझे तृप्त नहीं करती ॥7-8॥
People with limited wisdom worship me in other ways in vain. I do not accept that. That worship does not satisfy me. ॥ 7-8॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas