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mahabharat 13.131.7-8: अल्पबुद्धि वाले लोग व्यर्थ ही अन्य प्रकार से मेरी पूजा करते हैं। मैं उसे स्वीकार नहीं करता। वह पूजा मुझे तृप्त नहीं करती ॥7-8॥   |   mahabharat अध्याय 13.131: विष्णु, बलदेव, देवगण, धर्म, अग्नि, विश्वामित्र, गोसमुदाय और ब्रह्माजीके द्वारा धर्मके गूढ़ रहस्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 131: विष्णु, बलदेव, देवगण, धर्म, अग्नि, विश्वामित्र, गोसमुदाय और ब्रह्माजीके द्वारा धर्मके गूढ़ रहस्यका वर्णन  »  श्लोक 7-8
 
 
श्लोक  13.131.7-8 
अन्यथा हि वृथा मर्त्या: पूजयन्त्यल्पबुद्धय:॥ ७॥
नाहं तत् प्रतिगृह्णामि न सा तुष्टिकरी मम॥ ८॥
 
 
अनुवाद
अल्पबुद्धि वाले लोग व्यर्थ ही अन्य प्रकार से मेरी पूजा करते हैं। मैं उसे स्वीकार नहीं करता। वह पूजा मुझे तृप्त नहीं करती ॥7-8॥
 
People with limited wisdom worship me in other ways in vain. I do not accept that. That worship does not satisfy me. ॥ 7-8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)