श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 131: विष्णु, बलदेव, देवगण, धर्म, अग्नि, विश्वामित्र, गोसमुदाय और ब्रह्माजीके द्वारा धर्मके गूढ़ रहस्यका वर्णन  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  13.131.50 
एतद् व: परमं गुह्यं कथितं द्विजसत्तमा:।
यन्मां भवन्त: पृच्छन्ति सूक्ष्मतत्त्वार्थदर्शिन:॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
हे श्रेष्ठ ब्राह्मणों! आप इस विषय के सूक्ष्म अर्थों को भली-भाँति जानते हैं। आपने मुझसे जो पूछा है, उसके अनुसार मैंने आपको यह परम गूढ़ रहस्य बताया है ॥50॥
 
O great Brahmins! You are well versed in the subtleties and meanings of the matter. According to what you have asked me, I have told you this most profound secret. ॥ 50॥
 
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि देवरहस्ये षड्‍‍विंशत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १२६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें देवताओंका रहस्यविषयक एक सौ छब्बीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२६॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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