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श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 131: विष्णु, बलदेव, देवगण, धर्म, अग्नि, विश्वामित्र, गोसमुदाय और ब्रह्माजीके द्वारा धर्मके गूढ़ रहस्यका वर्णन  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  13.131.46 
ब्रह्मोवाच
अहो प्रश्नो महाभागा गूढार्थ: परम: शुभ:।
सूक्ष्म: श्रेयांश्च मर्त्यानां भवद्भि: समुदाहृत:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी बोले, 'बड़े भाग्यशाली सप्तर्षियों! तुमने एक ऐसा प्रश्न प्रस्तुत किया है जो अत्यंत शुभ है, गूढ़ अर्थ वाला है, सूक्ष्म है और मनुष्यों के लिए कल्याणकारी है।
 
Brahmaji said, 'Very fortunate Saptarishis! You have put forward a question which is extremely auspicious, has a deep meaning, is subtle and beneficial for humans.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)