श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 131: विष्णु, बलदेव, देवगण, धर्म, अग्नि, विश्वामित्र, गोसमुदाय और ब्रह्माजीके द्वारा धर्मके गूढ़ रहस्यका वर्णन  »  श्लोक 42-43h
 
 
श्लोक  13.131.42-43h 
भीष्म उवाच
अथ सप्त महाभागा ऋषयो लोकविश्रुता:।
वसिष्ठप्रमुखा: सर्वे ब्रह्माणं पद्मसम्भवम्॥ ४२॥
प्रदक्षिणमभिक्रम्य सर्वे प्राञ्जलय: स्थिता:।
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - राजन ! तत्पश्चात् महाभाग्यशाली, विश्वविख्यात वसिष्ठ आदि सप्तर्षियों ने कमलदल की परिक्रमा की और वे सब-के-सब हाथ जोड़कर उनके सामने खड़े हो गए ॥42 1/2॥
 
Bhishmaji says – King! Thereafter, all the seven sages like the great fortunate, the world famous Vasistha etc. circumambulated the lotus lotus and all of them stood in front of him with folded hands. 42 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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