Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.131.4-5h: जो मनुष्य जल से निकलते हुए बौने ब्राह्मण और वराह को देखकर उन्हें प्रणाम करता है और उनके द्वारा उठाई गई मिट्टी को अपने सिर से लगाता है, ऐसा मनुष्य कभी भी विपत्ति या पाप को प्राप्त नहीं होता ॥4 1/2॥ | mahabharat अध्याय 13.131: विष्णु, बलदेव, देवगण, धर्म, अग्नि, विश्वामित्र, गोसमुदाय और ब्रह्माजीके द्वारा धर्मके गूढ़ रहस्यका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वामनं ब्राह्मणं दृष्ट्वा वराहं च जलोत्थितम्।
उद्धृतां धरणीं चैव मूर्ध्ना धारयते तु य:॥ ४॥
न तेषामशुभं किंचित् कल्मषं चोपपद्यते।
अनुवाद
जो मनुष्य जल से निकलते हुए बौने ब्राह्मण और वराह को देखकर उन्हें प्रणाम करता है और उनके द्वारा उठाई गई मिट्टी को अपने सिर से लगाता है, ऐसा मनुष्य कभी भी विपत्ति या पाप को प्राप्त नहीं होता ॥4 1/2॥
A person who, on seeing a dwarf brahmin and a boar emerging from the water, salutes them and touches the clay raised by them to his head, such a person never incurs any misfortune or sin. ॥ 4 1/2 ॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥