| श्री महाभारत » पर्व 13: अनुशासन पर्व » अध्याय 131: विष्णु, बलदेव, देवगण, धर्म, अग्नि, विश्वामित्र, गोसमुदाय और ब्रह्माजीके द्वारा धर्मके गूढ़ रहस्यका वर्णन » श्लोक 38-39 |
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| | | | श्लोक 13.131.38-39  | गाव ऊचु:
बहुले समंगे ह्यकुतोऽभये च
क्षेमे च सख्येव हि भूयसी च।
यथा पुरा ब्रह्मपुरे सवत्सा
शतक्रतोर्वज्रधरस्य यज्ञे॥ ३८॥
भूयश्च या विष्णुपदे स्थिता या
विभावसोश्चापि पथे स्थिता या।
देवाश्च सर्वे सह नारदेन
प्रकुर्वते सर्वसहेति नाम॥ ३९॥ | | | | | | अनुवाद | | गौएँ बोलीं - 'बहुले! समंगे! अकूतोभये! क्षेमे!' 'सखी, भूयसि' इन नामों से गायों की उनके बछड़ों सहित स्तुति की गई, तब आकाश में स्थित और सूर्य के मार्ग में उपस्थित सभी गौओं को नारद सहित सभी देवताओं ने 'सर्वसह' नाम दिया ॥38-39॥ | | | | The cows said, 'Bahule! Samange! Akutobhaye! Ksheme! The cows along with their calves were praised by chanting the names 'Sakhi, Bhuyasi', then all the cows which were situated in the sky and which were present in the path of the Sun, all the gods including Narada named them 'Sarvasaha'. 38-39॥ | | ✨ ai-generated | | |
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