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श्लोक  13.131.32 
आजन्मनां शतं चैव नरके पच्यते तु स:।
निष्कृतिं च न तस्यापि अनुमन्यन्ति कर्हिचित्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
वह सौ जन्मों तक नरक में तपता है। ऋषिगण उसकी मुक्ति का कभी अनुमोदन नहीं करते।
 
He is cooked in hell for a hundred births. The sages never approve of his salvation.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)