Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.131.3: मनुष्य को प्रतिदिन श्रेष्ठ ब्राह्मणों को प्रणाम करना चाहिए। भोजन के पश्चात अपने दोनों पैरों की सेवा करनी चाहिए, अर्थात पैरों को अच्छी तरह धोकर तीर्थ की मिट्टी से सुदर्शन चक्र बनाकर उस पर मेरी पूजा करनी चाहिए तथा नाना प्रकार के नैवेद्य अर्पित करने चाहिए। ऐसा करने वाले मनुष्यों पर मैं संतुष्ट रहती हूँ। | mahabharat अध्याय 13.131: विष्णु, बलदेव, देवगण, धर्म, अग्नि, विश्वामित्र, गोसमुदाय और ब्रह्माजीके द्वारा धर्मके गूढ़ रहस्यका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मनुष्य को प्रतिदिन श्रेष्ठ ब्राह्मणों को प्रणाम करना चाहिए। भोजन के पश्चात अपने दोनों पैरों की सेवा करनी चाहिए, अर्थात पैरों को अच्छी तरह धोकर तीर्थ की मिट्टी से सुदर्शन चक्र बनाकर उस पर मेरी पूजा करनी चाहिए तथा नाना प्रकार के नैवेद्य अर्पित करने चाहिए। ऐसा करने वाले मनुष्यों पर मैं संतुष्ट रहती हूँ।
One should pay obeisance to the best Brahmins daily. After the meal, serve both your feet, that is, wash the feet thoroughly and make Sudarshan Chakra from the clay of the pilgrimage site and worship me on it and offer various types of offerings. I am satisfied with those people who do this. 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥