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mahabharat 13.131.24-26h: धर्म ने कहा- यदि ब्राह्मण राजा का कर्मचारी हो, वेतन के लिए घंटा बजाता हो, दूसरों का सेवक हो, गोरक्षा और वाणिज्य का व्यवसाय करता हो, शिल्पी या अभिनेता हो, मित्रों से विश्वासघात करता हो, वेदों का अध्यन न किया हो या शूद्र जाति की स्त्री का पति हो, तो ऐसे लोगों को देवताओं के कार्य (यज्ञ) और पितृकार्य (श्राद्ध) के लिए किसी भी प्रकार से भोजन नहीं देना चाहिए। जो लोग उन्हें पिण्ड या भोजन देते हैं, वे पतित होते हैं और उनके पितर भी तृप्त नहीं होते।   |   mahabharat अध्याय 13.131: विष्णु, बलदेव, देवगण, धर्म, अग्नि, विश्वामित्र, गोसमुदाय और ब्रह्माजीके द्वारा धर्मके गूढ़ रहस्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 131: विष्णु, बलदेव, देवगण, धर्म, अग्नि, विश्वामित्र, गोसमुदाय और ब्रह्माजीके द्वारा धर्मके गूढ़ रहस्यका वर्णन  »  श्लोक 24-26h
 
 
श्लोक  13.131.24-26h 
धर्म उवाच
राजपौरुषिके विप्रे घाण्टिके परिचारिके।
गोरक्षके वाणिजके तथा कारुकुशीलवे॥ २४॥
मित्रद्रुह्यनधीयाने यश्च स्याद् वृषलीपति:।
एतेषु दैवं पित्र्यं वा न देयं स्यात् कथंचन॥ २५॥
पिण्डदास्तस्य हीयन्ते न च प्रीणाति वै पितॄन्।
 
 
अनुवाद
धर्म ने कहा- यदि ब्राह्मण राजा का कर्मचारी हो, वेतन के लिए घंटा बजाता हो, दूसरों का सेवक हो, गोरक्षा और वाणिज्य का व्यवसाय करता हो, शिल्पी या अभिनेता हो, मित्रों से विश्वासघात करता हो, वेदों का अध्यन न किया हो या शूद्र जाति की स्त्री का पति हो, तो ऐसे लोगों को देवताओं के कार्य (यज्ञ) और पितृकार्य (श्राद्ध) के लिए किसी भी प्रकार से भोजन नहीं देना चाहिए। जो लोग उन्हें पिण्ड या भोजन देते हैं, वे पतित होते हैं और उनके पितर भी तृप्त नहीं होते।
 
Dharma said- If a Brahmin is an employee of the king, rings a bell for a salary, is a servant of others, does business of cow protection and commerce, is an artisan or an actor, betrays friends, has not read Vedas or is the husband of a woman belonging to Shudra caste, then such people should not be given food for the work of Gods (Yagna) and Pitrakarya (Shraddha) in any way. Those who offer pinda or food to them, they are degraded and their ancestors are also not satisfied. 24-25 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)