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श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 131: विष्णु, बलदेव, देवगण, धर्म, अग्नि, विश्वामित्र, गोसमुदाय और ब्रह्माजीके द्वारा धर्मके गूढ़ रहस्यका वर्णन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  13.131.20 
देवा ऊचु:
प्रगृह्यौदुम्बरं पात्रं तोयपूर्णमुदङ्मुख:।
उपवासं तु गृह्णीयाद् यद् वा संकल्पयेद् व्रतम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
भगवान ने कहा - मनुष्य जल से भरा तांबे का पात्र लेकर उत्तर दिशा की ओर मुख करके व्रत का संकल्प ले अथवा कोई अन्य व्रत करने का संकल्प ले।
 
The God said - The man should take a copper vessel filled with water, face north and take the vow of fasting or resolve to observe some other fast.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)