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mahabharat 13.131.18: जो मनुष्य प्रतिदिन प्रातःकाल उठकर गौ, घी, दही, राई और सरसों का स्पर्श करता है, वह पापों से मुक्त हो जाता है ॥18॥   |   mahabharat अध्याय 13.131: विष्णु, बलदेव, देवगण, धर्म, अग्नि, विश्वामित्र, गोसमुदाय और ब्रह्माजीके द्वारा धर्मके गूढ़ रहस्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 131: विष्णु, बलदेव, देवगण, धर्म, अग्नि, विश्वामित्र, गोसमुदाय और ब्रह्माजीके द्वारा धर्मके गूढ़ रहस्यका वर्णन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  13.131.18 
कल्य उत्थाय यो मर्त्य: स्पृशेद् गां वै घृतं दधि।
सर्षपं च प्रियङ्गुं च कल्मषात् प्रतिमुच्यते॥ १८॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य प्रतिदिन प्रातःकाल उठकर गौ, घी, दही, राई और सरसों का स्पर्श करता है, वह पापों से मुक्त हो जाता है ॥18॥
 
He who wakes up every morning and touches a cow, ghee, curd, mustard seeds and mustard seeds, becomes free from sins. ॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)