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mahabharat 13.131.17: बलदेव जी बोले - मैं तुम्हें एक अत्यन्त गोपनीय विषय बता रहा हूँ जो मनुष्यों को सुख देने वाला है और जिसे न जानने के कारण मूर्ख मनुष्य प्रेत योनियों से पीड़ित होकर नाना प्रकार के क्लेश भोगते हैं, उसे सुनो।   |   mahabharat अध्याय 13.131: विष्णु, बलदेव, देवगण, धर्म, अग्नि, विश्वामित्र, गोसमुदाय और ब्रह्माजीके द्वारा धर्मके गूढ़ रहस्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 131: विष्णु, बलदेव, देवगण, धर्म, अग्नि, विश्वामित्र, गोसमुदाय और ब्रह्माजीके द्वारा धर्मके गूढ़ रहस्यका वर्णन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  13.131.17 
बलदेव उवाच
श्रूयतां परमं गुह्यं मानुषाणां सुखावहम्।
अजानन्तो यदबुधा: क्लिश्यन्ते भूतपीडिता:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
बलदेव जी बोले - मैं तुम्हें एक अत्यन्त गोपनीय विषय बता रहा हूँ जो मनुष्यों को सुख देने वाला है और जिसे न जानने के कारण मूर्ख मनुष्य प्रेत योनियों से पीड़ित होकर नाना प्रकार के क्लेश भोगते हैं, उसे सुनो।
 
Baldev Ji said - I am telling you about a very secret subject which gives happiness to human beings and which foolish people, due to not knowing about it, are afflicted by evil spirits and suffer various kinds of troubles; listen to it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)