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mahabharat 13.131.15: जो प्रातःकाल की प्रार्थना करके सूर्य की ओर मुख करके खड़ा होता है, उसे समस्त तीर्थों में स्नान का फल प्राप्त होता है और वह समस्त पापों से मुक्त हो जाता है॥15॥   |   mahabharat अध्याय 13.131: विष्णु, बलदेव, देवगण, धर्म, अग्नि, विश्वामित्र, गोसमुदाय और ब्रह्माजीके द्वारा धर्मके गूढ़ रहस्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 131: विष्णु, बलदेव, देवगण, धर्म, अग्नि, विश्वामित्र, गोसमुदाय और ब्रह्माजीके द्वारा धर्मके गूढ़ रहस्यका वर्णन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  13.131.15 
ऐन्द्रीं संध्यामुपासित्वा आदित्याभिमुख: स्थित:।
सर्वतीर्थेषु स स्नातो मुच्यते सर्वकिल्बिषै:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
जो प्रातःकाल की प्रार्थना करके सूर्य की ओर मुख करके खड़ा होता है, उसे समस्त तीर्थों में स्नान का फल प्राप्त होता है और वह समस्त पापों से मुक्त हो जाता है॥15॥
 
He who stands facing the Sun after performing the morning prayers, gets the benefit of bathing in all the holy places and is freed from all sins.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)