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mahabharat 13.131.10: आप ही समस्त प्राणियों को उत्पन्न करने वाले हैं, आप ही समस्त प्राणियों का संहार करने वाले हैं तथा आप ही मनुष्य सहित समस्त प्राणियों के शाश्वत स्वरूप (मूल कारण) हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.131: विष्णु, बलदेव, देवगण, धर्म, अग्नि, विश्वामित्र, गोसमुदाय और ब्रह्माजीके द्वारा धर्मके गूढ़ रहस्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.131.10 
भवान् सृजति भूतानि भवान् संहरति प्रजा:।
प्रकृति: सर्वभूतानां समर्त्यानां सनातनी॥ १०॥
 
 
अनुवाद
आप ही समस्त प्राणियों को उत्पन्न करने वाले हैं, आप ही समस्त प्राणियों का संहार करने वाले हैं तथा आप ही मनुष्य सहित समस्त प्राणियों के शाश्वत स्वरूप (मूल कारण) हैं।
 
You are the one who creates all living beings, you are the one who destroys all creatures and you are the eternal nature (root cause) of all living beings including human beings.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)