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mahabharat 13.130.81-82: तपोधन! जो मनुष्य अमावस्या के दिन ताँबे के पात्र में शहद और तिल से मिश्रित जल लेकर अपने पितरों को तर्पण करते हैं, उनका रहस्यसहित श्राद्धकर्म यथावत् संपन्न होता है। 81-82॥   |   mahabharat अध्याय 13.130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद  »  श्लोक 81-82
 
 
श्लोक  13.130.81-82 
अमावास्यां तु ये मर्त्या: प्रयच्छन्ति तिलोदकम्॥ ८१॥
पात्रमौदुम्बरं गृह्य मधुमिश्रं तपोधन।
कृतं भवति तै: श्राद्धं सरहस्यं यथार्थवत्॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
तपोधन! जो मनुष्य अमावस्या के दिन ताँबे के पात्र में शहद और तिल से मिश्रित जल लेकर अपने पितरों को तर्पण करते हैं, उनका रहस्यसहित श्राद्धकर्म यथावत् संपन्न होता है। 81-82॥
 
Tapodhan! Those people who take water mixed with honey and sesame seeds in a copper vessel and offer it to their ancestors, on the day of Amavasya, the Shraddha ritual along with its mystery is performed accurately. 81-82॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)