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mahabharat 13.130.80-81h: वर्षा ऋतु में दीपदान करने से मनुष्य चन्द्रमा के समान सुन्दर हो जाता है। जो दीपदान करता है, उसके लिए नरक का अंधकार नहीं रहता।   |   mahabharat अध्याय 13.130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद  »  श्लोक 80-81h
 
 
श्लोक  13.130.80-81h 
वर्षासु दीपदानेन शशिवच्छोभते नर:॥ ८०॥
तमोरूपं न तस्यास्ति दीपकं य: प्रयच्छति।
 
 
अनुवाद
वर्षा ऋतु में दीपदान करने से मनुष्य चन्द्रमा के समान सुन्दर हो जाता है। जो दीपदान करता है, उसके लिए नरक का अंधकार नहीं रहता।
 
By donating lamps during the rainy season, a man becomes as beautiful as the moon. For the one who donates lamps, there is no darkness of hell. 80 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)