Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.130.8: हे पापरहित राजा! जो मनुष्य इस प्रकार धर्म को जानता है और जानकर उसके अनुसार आचरण करता है, वह पाप करने पर भी उस दोष से मुक्त हो जाता है और उन सद्गुणों से युक्त हो जाता है॥8॥ | mahabharat अध्याय 13.130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यश्चैतदेवं जानीयाज्ज्ञात्वा वा कुरुतेऽनघ।
सदोषोऽदोषवांश्चेह तैर्गुणै: सह युज्यते॥ ८॥
अनुवाद
हे पापरहित राजा! जो मनुष्य इस प्रकार धर्म को जानता है और जानकर उसके अनुसार आचरण करता है, वह पाप करने पर भी उस दोष से मुक्त हो जाता है और उन सद्गुणों से युक्त हो जाता है॥8॥
Sinless King! One who knows the Dharma in this manner and acts accordingly after knowing it, even if he has committed a sin, becomes free from that fault and is filled with those good qualities. ॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥