Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.130.77-78h: ‘हे तपस्वियों! नील गाय को छोड़ने, वर्षा ऋतु में दीपक जलाने और अमावस्या को तिल मिश्रित जल अर्पण करने से क्या लाभ होता है?’॥77 1/2॥ | mahabharat अध्याय 13.130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
के गुणा नीलषण्डस्य प्रमुक्तस्य तपोधना:॥ ७७॥
वर्षासु दीपदानेन तथैव च तिलोदकै:।
अनुवाद
‘हे तपस्वियों! नील गाय को छोड़ने, वर्षा ऋतु में दीपक जलाने और अमावस्या को तिल मिश्रित जल अर्पण करने से क्या लाभ होता है?’॥77 1/2॥
‘O ascetics! What are the benefits of releasing a blue bull, lighting lamps during the rainy season and offering water mixed with sesame seeds on the new moon day?'॥ 77 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥