Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.130.76-77h: पितरों की यह वाणी सुनकर तपस्वी महाप्रतापी वृद्ध गार्ग्य के शरीर में रोमांच उत्पन्न हुआ और उन्होंने उनसे इस प्रकार पूछा -॥76 1/2॥ | mahabharat अध्याय 13.130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पितरों की यह वाणी सुनकर तपस्वी महाप्रतापी वृद्ध गार्ग्य के शरीर में रोमांच उत्पन्न हुआ और उन्होंने उनसे इस प्रकार पूछा -॥76 1/2॥
Hearing this speech of the ancestors, the great and illustrious Vriddha Gargya, who was rich in penance, felt a thrill in his body and asked them thus -॥ 76 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥