Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.130.74-75h: इस प्रकार निष्कपटता से किया गया दान अक्षय एवं महान फल देता है तथा उससे हमें शाश्वत संतुष्टि भी प्राप्त होती है - ऐसा शास्त्रों का कथन है। | mahabharat अध्याय 13.130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अक्षयं निर्व्यलीकं च दानमेतन्महाफलम्॥ ७४॥
अस्माकं परितोषश्च अक्षय: परिकीर्त्यते।
अनुवाद
इस प्रकार निष्कपटता से किया गया दान अक्षय एवं महान फल देता है तथा उससे हमें शाश्वत संतुष्टि भी प्राप्त होती है - ऐसा शास्त्रों का कथन है।
In this way, charity done with sincerity yields everlasting and great fruits and we also get everlasting satisfaction from it - this is the statement of the scriptures.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥