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mahabharat 13.130.7: जिसमें महान फल देने वाला ऋषिधर्म अपने रहस्यों सहित समाया हुआ है और जिसके करने से बड़े-बड़े दानों और सम्पूर्ण यज्ञों का फल प्राप्त होता है ॥7॥   |   mahabharat अध्याय 13.130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  13.130.7 
ऋषिधर्म: स्मृतो यत्र सरहस्यो महाफल:।
महादानफलं चैव सर्वयज्ञफलं तथा॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जिसमें महान फल देने वाला ऋषिधर्म अपने रहस्यों सहित समाया हुआ है और जिसके करने से बड़े-बड़े दानों और सम्पूर्ण यज्ञों का फल प्राप्त होता है ॥7॥
 
In which the great fruit-giving Rishidharma is included along with its secrets and by performing which one gets the fruits of big donations and complete sacrifices. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)