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mahabharat 13.130.65-66h: जो लोग प्रज्वलित यज्ञ में समिधा नहीं डालते, उनके अग्निहोत्र में अग्निदेव आहुति स्वीकार नहीं करते (अतः अग्नि प्रज्वलित किए बिना आहुति नहीं देनी चाहिए)। 65 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद  »  श्लोक 65-66h
 
 
श्लोक  13.130.65-66h 
हव्यवाहस्य दीप्तस्य समिधं ये न जुह्वति॥ ६५॥
अग्निकार्येषु वै तेषां हव्यं नाश्नाति पावक:।
 
 
अनुवाद
जो लोग प्रज्वलित यज्ञ में समिधा नहीं डालते, उनके अग्निहोत्र में अग्निदेव आहुति स्वीकार नहीं करते (अतः अग्नि प्रज्वलित किए बिना आहुति नहीं देनी चाहिए)। 65 1/2॥
 
Those who do not offer Samidha in the lit sacrificial fire, Agnidev does not accept the oblations in their Agnihotra (hence, one should not offer the oblation without lighting the fire). 65 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)