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mahabharat 13.130.62: वासव! ब्रह्माजी ने साक्षात् सूर्य, वायु, अग्नि तथा लोकमाता गौओं की रचना की है। 62॥   |   mahabharat अध्याय 13.130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  13.130.62 
भानुमाननिलश्चैव हव्यवाहश्च वासव।
लोकानां मातरश्चैव गाव: सृष्टा: स्वयम्भुवा॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
वासव! ब्रह्माजी ने साक्षात् सूर्य, वायु, अग्नि तथा लोकमाता गौओं की रचना की है। 62॥
 
Vasav! Brahmaji has actually created the sun, air, fire and Lokmata cows. 62॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)