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mahabharat 13.130.53-54h: एक और गहन रहस्य सुनो, जिसका ऋषियों ने मनन किया है। मैंने इसे बृहस्पतिजी के मुख से सुना था, जब वे भगवान शंकर के स्थान पर भगवान रुद्र के साथ बोल रहे थे। देवेश! शचीपते! इसे ध्यानपूर्वक सुनो।   |   mahabharat अध्याय 13.130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद  »  श्लोक 53-54h
 
 
श्लोक  13.130.53-54h 
श्रूयतां चापरं गुह्यं रहस्यमृषिचिन्तितम्।
श्रुतं मे भाषमाणस्य स्थाणो: स्थाने बृहस्पते:॥ ५३॥
रुद्रेण सह देवेश तन्निबोध शचीपते।
 
 
अनुवाद
एक और गहन रहस्य सुनो, जिसका ऋषियों ने मनन किया है। मैंने इसे बृहस्पतिजी के मुख से सुना था, जब वे भगवान शंकर के स्थान पर भगवान रुद्र के साथ बोल रहे थे। देवेश! शचीपते! इसे ध्यानपूर्वक सुनो।
 
Listen to another deep secret, which has been contemplated upon by the sages. I heard it from Brihaspatiji's mouth while he was speaking in the place of Lord Shankar, along with Lord Rudra. Devesh! Shachipate! Listen to it carefully.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)