Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.130.52: यदि कोई व्यक्ति अपने शरीर पर वट वृक्ष की जड़ रगड़ता है, सरसों का लेप लगाता है, तथा साठी चावल की खीर को दूध के साथ खाता है, तो वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है। | mahabharat अध्याय 13.130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदि कोई व्यक्ति अपने शरीर पर वट वृक्ष की जड़ रगड़ता है, सरसों का लेप लगाता है, तथा साठी चावल की खीर को दूध के साथ खाता है, तो वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है।
If one rubs his body with the roots of the Banyan tree, applies a paste of mustard seeds, and eats pudding made of Saathi rice with milk, then he becomes free from all sins.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥