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त्र्यहं स्नात: स भवति निराहारश्च वर्तते।
स्पृशते यो गवां पृष्ठं बालधिं च नमस्यति॥ ५०॥
अनुवाद
जो व्यक्ति गाय की पीठ को छूता है और उसकी पूंछ को प्रणाम करता है, वह ऐसा है मानो उसने तीन दिन उपवास किया हो और फिर उपर्युक्त तीर्थों में स्नान किया हो।
A person who touches the back of a cow and salutes its tail is as if he has fasted for three days and then taken a bath at the above-mentioned holy places.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥