Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.130.48-49: इन्द्र बोले, 'मुनि! मनुष्य को चाहिए कि मन ही मन कुरुक्षेत्र, गया, गंगा, प्रभास और पुष्कर क्षेत्र का स्मरण करके जल में स्नान करे। ऐसा करने से वह पापों से उसी प्रकार मुक्त हो जाता है, जैसे राहु के ग्रहण से चन्द्रमा मुक्त हो जाता है।' | mahabharat अध्याय 13.130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इन्द्र बोले, 'मुनि! मनुष्य को चाहिए कि मन ही मन कुरुक्षेत्र, गया, गंगा, प्रभास और पुष्कर क्षेत्र का स्मरण करके जल में स्नान करे। ऐसा करने से वह पापों से उसी प्रकार मुक्त हो जाता है, जैसे राहु के ग्रहण से चन्द्रमा मुक्त हो जाता है।'
Indra said, 'Muni! A man should think of Kurukshetra, Gaya, Ganga, Prabhas and Pushkar Kshetra in his mind and then take a bath in the water. By doing so, he is freed from sins in the same way as the moon is freed from the eclipse of Rahu.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥