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mahabharat 13.130.47-48h: उनका यह प्रश्न सुनकर समस्त देवता, तपोधन ऋषि और महाभाग पितर विद्युत्प्रभ मुनि की बहुत प्रशंसा करने लगे ॥47 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद  »  श्लोक 47-48h
 
 
श्लोक  13.130.47-48h 
ततो देवगणा: सर्वे ऋषयश्च तपोधना:॥ ४७॥
पितरश्च महाभागा: पूजयन्ति स्म तं मुनिम्।
 
 
अनुवाद
उनका यह प्रश्न सुनकर समस्त देवता, तपोधन ऋषि और महाभाग पितर विद्युत्प्रभ मुनि की बहुत प्रशंसा करने लगे ॥47 1/2॥
 
Hearing this question of his, all the gods, Tapodhan Rishi and Mahabhag ancestors started praising Vidyutprabha Muni a lot. 47 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)