Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.130.46-47h: ‘देवराज! जो मनुष्य मोहवश पशु-जगत में मृग, पक्षी, भेड़ आदि प्राणियों को तथा कीड़े, चींटी, सर्प आदि को मारते हैं, वे बहुत से पापों का संचय करते हैं। उनके लिए इन पापों से छूटने का क्या उपाय है?’॥46 1/2॥ | mahabharat अध्याय 13.130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
‘देवराज! जो मनुष्य मोहवश पशु-जगत में मृग, पक्षी, भेड़ आदि प्राणियों को तथा कीड़े, चींटी, सर्प आदि को मारते हैं, वे बहुत से पापों का संचय करते हैं। उनके लिए इन पापों से छूटने का क्या उपाय है?’॥46 1/2॥
‘Devraj! Human beings who, out of attachment, kill animals in the animal world, deer, birds, sheep, etc., as well as insects, ants, snakes, accumulate many sins. What is the way for them to get rid of these sins?’॥ 46 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥