Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.130.45: उनका रूप सूर्य के समान तेज से चमक रहा था। धर्म का रहस्य सुनकर उन्होंने इंद्र से पूछा -   |   mahabharat अध्याय 13.130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  13.130.45 
आदित्यतेजसा तस्य तुल्यं रूपं प्रकाशते।
स च धर्मरहस्यानि श्रुत्वा शक्रमथाब्रवीत्॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
उनका रूप सूर्य के समान तेज से चमक रहा था। धर्म का रहस्य सुनकर उन्होंने इंद्र से पूछा -
 
His form was shining with brilliance like the Sun. After listening to the mysteries of religion he asked Indra -
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)